ये बोला आँख से आंसू के माँ ये क्या किया तूने , हमारी कौन सी ग़लती का ये बदला लिया तूने | कभी औलाद को अपनी जुदा माँ तो नहीं करती , फिर अपने लाल को क्यूँ घर से बेघर कर दिया तूने ||
जब से तेरे फ़िराक में जलने लगा हूँ मै , मानिंद -ऐ -मोम खुद ही पिघलने लगा हूँ मै |मुमकिन है मेरे मुंह से निकल आये अब लहू ,आंसू समझ के हीरे निगलने लगा हूँ मै ||