Showing posts with label Qa-Taat. Show all posts
Showing posts with label Qa-Taat. Show all posts

31 October 2011

लफ्जों का जादू

जिनका दिल ज़ुल्मतो से काला है

ऐसे लोगो का बोल बाला है

हमपे एहसाँ बहुत है लफ्जों के

हमने लफ्जों से पेट पाला है

गहरी नींद

बेक़रारी में मुब्तिला था मै

ज़िन्दगी भर न सो सका था मै

नींद आई है कब्र में आकर

उम्र भर का थका हुआ था मै

28 August 2010

What is the difference between Maa and other relations?


मेहनत के बावजूद जो पंहुचा मै अपने घर ,

वालिद का ये सवाल कमाया है तुने कुछ .

बीवी को और बच्चों को फरमाइशों की लत ,

बस माँ को ये ख्याल के खाया है तुने कुछ .

13 July 2010

तसव्वुफ़

क्यों कहु खुद से मै जुदा तुमको !

जब के अपना बना चूका तुमको !!

तुम तसव्वुर में आ गए फ़ौरन !

जब भी चाहा के देखता तुमको !!

02 April 2010

आँख और आंसू





ये बोला आँख से आंसू के माँ ये क्या किया तूने ,
हमारी कौन सी ग़लती का ये बदला लिया तूने |
कभी औलाद को अपनी जुदा माँ तो नहीं करती ,
फिर अपने लाल को क्यूँ घर से बेघर कर दिया तूने ||


ये बोली आँख आंसू से जुदा बस यूँ किया तुझको ,
बुलंदी पर पहुचने का दिया है रास्ता तुझको |
अगर तू साथ रहता तो तेरी क्या अहमियत होती ,
ज़मीं पे गिर के ही तो मर्तबा आला मिला तुझको ||

01 April 2010

सुराग

शब् भर हमारी याद में ऐसे जगे हो तुम ,

आराम तर्क कर के टहलते रहे हो तुम !

बिस्तर की सिलवटो से महसूस हो गया ,

कुछ देर पहले उठ के यहाँ से गए हो तुम !!

तनहा -सफ़र

दिन मुसीबत के टल नहीं सकते ,

हम भी किस्मत बदल नहीं सकते !

हम तखय्युल को साथ रखते है ,

तुम तो हमराह चल नहीं सकते !!

19 March 2010

अपना घर

परदेस में रहने की ख़ुशी और अलम और ,

याद आये अगर घर की तो होता है सितम और !!.

परदेस से खींचे है कशिश घर की कुछ ऐसे ,

जाना हो अगर घर पे तो बढ़ते है क़दम और !!.

अर्ज़ -ए - हाल

हम अपनी जान किसी पर निसार कैसे करें !

तुझे भुला के किसी और से प्यार कैसे करें !!.

तेरे बिछड़ने से दुनिया उजड़ गयी दिल की !

इस उजड़े दिल को अब हम खुशगवार कैसे करें !!

जदीदियत

ख्याल उठने से पहले ही सो गए होंगे !

कुछ अपने हाल -ए -तबाही पे रो गए होंगे !!

जदीद ज़ेहन में मैदाने -ए -कर्बला की तरह ,

शहीद कितने ही अलफ़ाज़ हो गए होंगे !!

18 March 2010

एहसास

रब्त -ए -नाज़ुक की शुरुआत भी हो सकती है ,

लब हिलेंगे नहीं और बात भी हो सकती है !!.

हमसे मिलने का कभी दिल में न तुम ग़म करना ,

बंद आँखों में मुलाक़ात भी हो सकती है !!

16 March 2010

हाल

उससे बिछड़ के ऐसे मेरा दिल उदास है ,

जैसे बिछड़ के मौज से साहिल उदास है !.

मै कर रहा हु इसलिए हसने की कोशिशे ,

मुझको उदास देख के महफ़िल उदास है !!

कोशिश

तुने शब् -ऐ -विसाल को आने नहीं दिया ,

मैंने भी इस मलाल को आने नहीं दिया !!

रक्खा है खुद को दूर तेरी याद से बहुत

दिल में तेरे ख्याल को आने नहीं दिया !!

ज़ब्त



जब से तेरे फ़िराक में जलने लगा हूँ मै , मानिंद -ऐ -मोम खुद ही पिघलने लगा हूँ मै |मुमकिन है मेरे मुंह से निकल आये अब लहू ,आंसू समझ के हीरे निगलने लगा हूँ मै ||

बद -किस्मती

वो है मेरा रफ़ीक मै उसका रकीब हु ,

दुनिया समझ रही है मै उसके करीब हु .

चाहा था जिसने मुझको मै उसका न हो सका ,

मै बदनसीब हु मै बहुत बदनसीब हु :

वा -बस्तगी

निगाह मिलते ही तुझको सलाम करता हु ,

तेरी नज़र का बड़ा एहतराम करता हु .

मेरी जुबा तेरी गुफ्तार से है वाबस्ता ,

ये कौन कहता है सबसे कलम करता हु :

09 March 2010

मशविरा

हरगिज़ न करना चाहिए इंसान को ग़ुरूर ,

दनिश्वरी के जौम में हो जाते है कुसूर .

मैंने तमाम उम्र किया है सफ़र मगर ,

अब तक ज़मी पे चलने का आया नहीं शऊर :

शोहरत

जब तलक मंसूब दिल से दिल न हो ,

दिल को तब तक हिचकिया मिलती नहीं .

इश्क करने से मिलेंगी शोहरतें ,

मुफ्त में बदनामिया मिलती नहीं .

नाकाम वफाएं

छोड़ कर वो साथ मेरा जब जुदा हो जायेगा ,

ज़ात पर इंसान की कुछ तब्सिराह हो जायेगा .

हद से ज्यादा कर रहा था मै वफाएं उसके साथ ,

मुझको क्या मालूम था वो बेवफा हो जायेगा .

16 February 2010

तकल-लुफ

इस बार वो ये बात अजब पूछते रहे ,

मेरी उदासियो का सबब पूछते रहे ;

अब ये मलाल है के बता देते राज़ -ऐ -दिल

तब कह सके न कुछ भी वो जब पूछते रहे !