03 November 2013

मेरे होते क्या गम तुझको क्यूँ ये भीगा काजल है |


ग़ज़ल

मेरे होते क्या गम तुझको क्यूँ ये भीगा काजल है |
तेरे चाँद से चेहरे पर क्यूँ छाया काला बादल है ||

तेरी जुल्फें काली घटाएं अम्बर तेरा आँचल है |
तेरा चेहरा चाँद का टुकड़ा और तारों की पायल है ||

साथ अगर तू मेरे हो तो सहरा लगता है गुलशन |
साथ अगर तू मेरे नहीं तो गुलशन क्या है जंगल है ||

तेरी कमर पे नागिन जैसी बल खाती हैं यूँ जुल्फें |
ऐसा लगता है कि जैसे जिस्म नहीं है संदल है ||

मुझको उस दिन से भी मुहब्बत है जिस दिन तुम मिलते थे |
मुझको तुम्हारी याद आती है जब भी आटा मंगल है ||

मैंने जब भी आँखें खोली सामने पाया है तुझको |
रूठने वाले सामने आ जा क्यूँ आँखों से ओझल है ||

तेरा हिलाल अब तुझसे रूठे ये मुमकिन तो नहीं होगा |
ये तेरा है तेरा रहेगा दीवाना है पागल है ||


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