18 January 2012

एकता और भाई चारे ही में है भारत की शान !




कह रहा है आज सबसे देश का ये संविधान---एकता और भाई चारे ही में है भारत की शान !
एकता होगी अगर तो देश का होगा विकास !
टिक न पायगी कभी बेरोज़गारी आस पास !!
एकता से उन्नति की डाल दो भारत में जान---एकता और भाई चारे ही में है भारत की शान !
एकता से देश की आज़ादी हमने पाई है!
देश का हर नागरिक आपस में भाई भाई है!!
हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई सभी है इक सामान---एकता और भाई चारे ही में है भारत की शान !
जिसके दिल में है मुहब्बत आदमी वो नेक है!
साईं बाबा ने कहा है सबका मालिक एक है!!
इक तरफ होती है पूजा इक तरफ होती अज़ान---एकता और भाई चारे ही में है भारत की शान !
दिल से सारे भेद भाव साफ़ कर डालेंगे आज!
एकता से सबको मिलकर देश की रखना है लाज!!
बात हमने दिल में अपने आज ही से ली है ठान---एकता और भाई चारे ही में है भारत की शान !
एकता और देश की सेवा हमारा कर्म है!
प्यार के रस्ते पे चलना ही हमारा धर्म है!!
क्यूँ करें कमज़ोर इसको देश है अपना महान---एकता और भाई चारे ही में है भारत की शान !
जो लिखा है मैंने ये सब आप ही का है कमाल !
वरना इस काबिल कहाँ है आपका अदना 'हिलाल'!!
आप ही से तो मिला है ये समझने का ज्ञान---एकता और भाई चारे ही में है भारत की शान !


08 January 2012

जो हो सके तो अमन का मन्ज़र तलाश कर !!


चाकू न सैफो बरछी न खन्जर तलाश कर !

जो हो सके तो अमन का मन्ज़र तलाश कर !!


जिस पर जबीं झुकी थी वो दर तलाश कर !

जिस घर को तुने छोड़ा है वो घर तलाश कर !!


खामोश हो गया हूँ समंदर की तरह मै !

है मुज़्तरिब जो करना तो कंकर तलश कर !!


कहने पे तेरे माँ को भला कैसे छोड़ दू !

तू ऐसा कर कि दूसरा शौहर तलाश कर


परदेस में सुकून किसे मिलता है "हिलाल"

चैनो सुकून अपने ही घर पर तलाश कर !!


तसव्वुराते यार से मिटी है सारी दूरियां !!

हमारा इश्क भी निहाँ तुम्हारा हुस्न भी निहाँ !
हमारे तुम हो राजदां तुम्हारे हम है राजदां !!

कोई अलम नहीं मुझे मै हूँ यहाँ वो है वहां !
तसव्वुराते यार से मिटी है सारी दूरियां !!

सदाबहार है चमन नहीं मुझे गमे खिजाँ !
ज़हेनसीब तुम हो जब मेरे चमन के निगहेबां !!

ज़रूर होगा मुश्तमिल इबादतों में इश्क भी !
जो दीद उनकी मिल गयी तो मिल गयी है नेकियाँ !!

वो शै तुम्हारी है फ़क़त वो जिसके तुम हो मुस्तहक !
बिला तकल्लुफ आओ तुम ये दिल तुम्हारा है मकाँ !!

तेरे गमे फिराक में ये शग्ले रोजो शब् मेरा !
हर एक शब् में ख्वाब है हर एक दिन है हिचकियाँ !!

जब अपना कह दिया मुझे तो जैसा हु निभाओ तुम !
हो चाहें मुझमे खूबियाँ हो हो चाहें मुझमे खामियां !!

निगाह अगर वो फेर लें तो सब जहाँ खिलाफ हो !
वो मुझपे अब है मेहरबां तो मुझपे सब मेहरबां !!

"हिलाल" ये ग़ज़ल नहीं ये मनक़बत है मनक़बत !
न समझो इसको मसनवी न समझो इसको दास्ताँ !!

31 October 2011

लफ्जों का जादू

जिनका दिल ज़ुल्मतो से काला है

ऐसे लोगो का बोल बाला है

हमपे एहसाँ बहुत है लफ्जों के

हमने लफ्जों से पेट पाला है

गहरी नींद

बेक़रारी में मुब्तिला था मै

ज़िन्दगी भर न सो सका था मै

नींद आई है कब्र में आकर

उम्र भर का थका हुआ था मै

इक दीप तुम जलाओ इक दीप हम जलाएं

दीपावली की खुशियाँ इस बार यूँ मनाएं -------इक दीप तुम जलाओ इक दीप हम जलाएं

ऐसे दिया जलाएं के दिल में रौशनी हो !
आपस में प्यार बांटे हम सब में दोस्ती हो !!

तुम हमसे प्यार पाओ हम तुमसे प्यार पायें -------इक दीप तुम जलाओ इक दीप हम जलाएं

दिल में जो हो अँधेरा किस काम की दिवाली!
इस बार रह न जाये दीवार दिल की काली !!

मन की बुराइयों को पहले चलो मिटायें------इक दीप तुम जलाओ इक दीप हम जलाएं

ये जात पात मज़हब ये ऊँच नीच क्या है!
ये व्यर्थ की है बातें इनसे न कुछ मिला है !!

इन राजनीतियों में क्यूँ हम समय गँवायें-----इक दीप तुम जलाओ इक दीप हम जलाएं

जो कुछ भी हो चुका है वो भूल जायें हम सब !
हमको न और तुमको शिकवा रहे कोई अब !!

हम एक दुसरे की अब समझें भावनायें ----इक दीप तुम जलाओ इक दीप हम जलाएं

हम देश वासियों की फिर ये विशेषता हो !
दिल में मुहब्बतें हों आपस में एकता हो !!

आओ हिलाल का हम ये गीत गुनगुनाएं ----इक दीप तुम जलाओ इक दीप हम जलाएं
दीपावली की खुशियाँ इस बार यूँ मनाएं-----इक दीप तुम जलाओ इक दीप हम जलाएं

मजबूर औरत की दास्ताँ

कितनी बदली हुई तकदीर नज़र आती है ।
ये जवानी मेरी तस्वीर नज़र आती है ।


हमने सोचा न था हालात कुछ ऐसे होंगे ।
हम जिन्हें अपना समझते थे पराये होंगे ।
अपनी दुनिया में अँधेरे ही अँधेरे होंगे ।
रहके महफ़िल में भी हम इतने अकेले होंगे ।


हर तरफ रंज की तदबीर नज़र आती है ।
कितनी बदली हुई तकदीर नज़र आती है ।



चन्द लम्हों के लिए लाश को जिंदा करके ।
अपनी दौलत से मेरे जिस्म का सौदा करके ।
मेरी इज्ज़त का सरे आम तमाशा करके ।
क्या मिला तुमको भरी बज़्म में रुसवा करके ।

अपनी पायल मुझे ज़ंजीर नज़र आती है ।
कितनी बदली हुई तकदीर नज़र आती है ।


यु न घुट घुट के जिया करती न उलझन होती ।
मेरा अरमान था के मै भी सुहागन होती ।
मेरे चेहरे पे पड़ी शर्म की चिलमन होती ।
कोई जो अक्स मेरा होता मै दरपन होती ।


आज ख्वाबों की न ताबीर नज़र आती है ।
कितनी बदली हुई तकदीर नज़र आती है ।
हिलाल बदायूँनी
Poet Hilal Badayuni

15 October 2011

क्यों अदीब अब तक है खोये ज़ुल्फ़ और रुखसार में !!

हमको रहना चाहिए अब सोह्बते तलवार में !
क्यों अदीब अब तक है खोये ज़ुल्फ़ और रुखसार में !!

जब तलक उलझा रहेगा दामने दिल खार में !
हम सुकू से रह नहीं पाएंगे इस गुलज़ार में !!

नकहते गुल सुबहे नौ शम्सो कमर अंजुम जिया !
नेमतें क्या क्या छुपी है यार के दीदार में !!

फर्द तेरे घर के
सारे
इक से बढ़कर एक है !
मै करू किस
किस
की तारीफें तेरे घरबार में !!

मुद्दतो जिस सांप को हमने पिलाया खूने दिल !
वो डराना चाहता है हमको इक फुस्कार में !!

रोजो शब् मसरूफियत कुछ इस क़दर बढ़ने लगी !
शायरी को वक़्त मिल पाता है बस इतवार में !!

तालिबे शर्म ओ हया हम , आप उरयानी पसंद !
फर्क कितना है हमारे आपके त्यौहार में !!

जैसा रिश्ता माँ में और बेटे में होता है 'हिलाल'
है फ़क़त वैसा ही रिश्ता फन में और फनकार में !!

07 October 2011

बेवफाई भी ज़रूरी है वफ़ा से पहले !!



मर्ज़ जिस तरह से लाजिम है दवा से पहले !
बेवफाई भी ज़रूरी है वफ़ा से पहले !!

ख्वाहिश ऐ दीद है यूँ दिल को क़ज़ा से पहले !
तुमसे मिलने की तमन्ना है खुदा से पहले !!

आरजू तो है चरागों को जलाने की मगर !
मुझको मालूम तो करने दो हवा से पहले !!

जब मेरा साथ निभाना ही नहीं था तुमको !
क्यों दिए मुझको मुहब्बत में दिलासे पहले !!

सिर्फ खिलअत से नहीं आबरू औरत की 'हिलाल ' !
शर्म आँखों में रखी जाये रिदा से पहले !!


27 June 2011

पहले दिल दिल में कोई राह बनायीं जाए !!


दिल में रहने की फिर उम्मीद लगायी जाए !
पहले दिल दिल में कोई राह बनायीं जाए !!

जिसमे सच्चाई की लज्ज़त हो वफ़ा की खुशबु !
मुंह से बस ऐसी क़सम वक़्त पे खायी जाए !!

दूरियों से तो कोई बात न बन पायेगी !
आओ मिल जुल के कोई बात बनायीं जाए !!

राह वो जो के भलाई की तरफ जाती हो !
सारी दुनिया को वो ही राह दिखाई जाए !!

आज की बीवियां ये सोचती रहती है सदा
माँ के हाथो में न शौहर की कमाई जाए !!

शर्म से चेहरा छुपा लेगा घटा में सूरज !
चेहरा ऐ हुस्न से चिलमन तो हटाई जाए !!

मत सुनाओ मेरी रूदादे मुहब्बत सबको !
जिससे रुसवाई हो वो बात छुपाई जाए !!

इश्क का दरिया हमे पार जो करना है हिलाल
कश्तिये इश्क सलीके से चलायी जाए !!

15 June 2011

तेरी आँखों से लड़ गयीं आँखें !

तेरी आँखों से लड़ गयीं आँखें !
कितनी उलझन में पड़ गयीं आँखें !!

आँख से जब बिछड़ गयीं आँखें !
आंसुओ में जकड़ गयीं आँखें !!

तू जो आया बहार लौट आयी !
तू गया तो उजड़ गयीं आँखें !!

तेरे आने की इन्तेज़ारी में !
घर की चौखट पे जड़ गयीं आँखें !!

आज फिर ज़िक्र छिड गया उसका !
आज फिर से उमड़ गयीं आँखें !!

रौशनी भी चला गया लेकर !
कैसे ज़ालिम से लड़ गयीं आँखें !!

बज़्म में जब हिलाल को देखा !
उसके चेहरे पे गड गयी आँखें !!

14 June 2011

पीने की और जिद न करो तुम नशे में हो !



पीने की और जिद न करो तुम नशे में हो !

अब मैकदे से घर भी चलो तुम नशे में हो ! !

ये क्या की सिर्फ मुझसे कहो तुम नशे में हो !
तुम भी मुझे पिलाके कहो तुम नशे में हो !!

पीते हो दस्ते ग़ैर से क्यों बज्मे ग़ैर में !
छोड़ो उठो यहाँ से चलो तुम नशे में हो !!

उतरेगा जब नशा तो मुझे भूल जाओगे !
मत वादा ऐ विसाल करो तुम नशे में हो !!

तुमको खबर नहीं है मगर मुझको होश है !
हट जाओ मुझसे दूर हटो तुम नशे में हो !!

हो जायगी ज़माने में रुसवाई इश्क की !
जो राज़ है वो राज़ रखो तुम नशे में हो !!

मैखाने से अभी तो मेरे यार आये है !
अब फिर से कह रहे हो चलो तुम नशे में हो !!

दानिशवाराने कौम ज़माना बदल गया !
रफ़्तार अपनी तेज़ करो तुम नशे में हो !!

मदफूं हिलाल तुमको भी होना है कब्र में !
पाकर बुलंदियां न उड़ो तुम नशे में हो !!

10 June 2011

अजनबी से अजीब रिश्ते है !

अजनबी से अजीब रिश्ते है !
यु लगे है करीब रिश्ते है !!

बन गए अपने दरमयां रिश्ते !
वाह क्या खुशनसीब रिश्ते है !!

दुश्मनों से ही कुछ ताल्लुक*1 है !
दोस्तों से गरीब रिश्ते है !!

बाप बेटे में बोलचाल नहीं !
हाय क्या बदनसीब रिश्ते है !!

पहले रिश्तो में कुछ रफ़ाक़त*2 थी !
लेकिन अब तो रकीब*3 रिश्ते है !!

किसको फुर्सत है मिलने जुलने की !
है गनीमत*4 नकीब*5 रिश्ते है !!

मै मरीज़े नआशना*6 हूँ हिलाल !
मेरी खातिर तबीब*7 रिश्ते है !!

१--सम्बन्ध २--मिलनसारी ३--दुश्मन ४--उचित ५--मुलाक़ात कराने वाला ६--अपरिचित ७--हकीम

06 June 2011

अब किसी और के हाथो में है हाथ उसके 'हिलाल'

उनको हरजाई बताऊँ तो बताऊँ कैसे !
खुद हंसी अपनी उडाऊं तो उडाऊं कैसे !!

मुझको ईकान है वो अब भी वफ़ा कर लेंगे !
बेवफा उनको बताऊँ तो बताऊँ कैसे !!

शोला ए हिज्र से ये और भड़क जाती है !
आग इस दिल की बुझाऊं तो बुझाऊं कैसे !!

उनके दरयाऐ मुहब्बत में है मौजों का हुजूम !
कश्तिये इश्क चलाऊं तो चलाऊं कैसे !!

लोग चेहरे के ता अस्सुर से समझ जाते है !
हाले दिल अपना छुपाऊं तो छुपाऊं कैसे !!

गुफ्तगू करने का मौक़ा ही नहीं मिलता है !
उनसे मै बात बढाऊं तो बढाऊं कैसे !!

अब किसी और के हाथो में है हाथ उसके 'हिलाल' !
उसको मै अपना बताऊँ तो बताऊँ कैसे !!

30 May 2011

मेरी मसरूफियत ने ही मुझे तनहा कराया है !!

ये कब कहता हूँ की तूने मुझे रुसवा कराया है !
मेरी मसरूफियत ने ही मुझे तनहा कराया है !!

उधर उसने मेरी खातिर रची है मौत की साज़िश !
इधर मैंने उसी की जान का सदका कराया है !!

मेरी बस इतनी ख्वाहिश थी तेरे हाथो से मर जाता !
बड़ा ज़ालिम है तूने ग़ैर से हमला कराया है !!

अगर कोई शिकायत थी तो मुझसे कह लिया होता !
ज़माने को बताकर क्यों मुझे रुसवा कराया है !!

''उसे माँ बाप से ग़फलत मुझे माँ बाप से उल्फत ''
ज़रा सी जिद ने इस आँगन का बटवारा कराया है !!

अहिंसा का पुजारी कह रहे हो तुम जिसे लोगो
तुम्हे मालुम है उसने यहाँ बलवा कराया है !!

जो शौके दीद देना था तो ताबे दीद भी देता !
की दीदावर को तेरी दीद ने अँधा कराया है !!

वो जिसकी मैंने करवाई मसर्रत से शनासाई !
हिलाल उसने ही मेरा दर्द से रिश्ता कराया है !!

14 May 2011

एक आरजू

मेरी आवाज़ में कुछ ऐसा असर हो जाये !
याद जिसको मै करूँ उसको खबर हो जाये !!

काश तशरीफ़ मेरे घर पे कभी वो लायें !
उनकी आमद से मु अत्तर मेरा घर हो जाये !!

वो अगर ज़ुल्फ़ बिखेरें तो घटाएं छायें !
वो अगर चेहरा दिखा दें तो सहर हो जाये !!

ज़हन ओ दिल के सभी दरवाज़े खुले रखता हूँ !
क्या पता कब तेरी यादों का गुज़र हो जाये !!

अश्क बारी का मेरी तुझपे असर ऐसा हो !
मै कभी रोऊँ तो दामन तेरा तर हो जाये !!

मुझको मिल जाये बुजुर्गों की दुआ चलते वक़्त!
बस यही मेरे लिए रख्ते सफ़र हो जाये !!

अब 'हिलाल' अपने लिए इसके सिवा क्या मांगे !
ज़िन्दगी पहलुए जानाँ में बसर हो जाये !!

05 March 2011

तुझे देखा था पिछली साल पहली बार होली में !


तुझे देखा था पिछली साल पहली बार होली में !

खुशाकिस्मत जो फिर से हो तेरा दीदार होली में !!


नज़र आने लगे यूँ प्यार के आसार होली में !

झुका के नज़रें उसने जब किया इकरार होली में !!


लगाया क्या गुलाबी रंग हमने तेरे चेहरे पर !

हुए है और भी ज्यादा हंसी रुखसार होली में !!


शरारत करने का मौक़ा मिला है आज किस्मत से !

हमे जी भर के रंगने दे न कर इनकार होली में !!


भुला कर सब गिले शिकवे चलो हम एक हो जायें !

खलिश दिल की मिटा डालें बढाएं प्यार होली में !!


गले हम भी मिलें तुमसे गले तुम भी मिलो हमसे !

न हो पाए कोई रंजिश कोई तकरार होली में !!


कहीं ना इत्तेफाकी का निशाँ बाकी न मिल पाए !

मुहब्बत की उड़े पिचकारियों से धार होली में !!


हमें छुप छुप के वो देखें, उन्हें छुप छुप के हम देखें !

हिलाल ऐसा मज़ा आता रहे हर बार होली में !!

06 January 2011

यह वर्ष हम सभी को हर तरह रास आये

यह वर्ष हम सभी को हर तरह रास आये--घर घर में शांति हो हर बच्चा मुस्कुराये

कठिनाइयों में अब तक गुज़रा हो जिसका जीवन
उम्मीद के गुलो से भर जाये उसका दमन
यह वर्ष हम सभी को जीवन नया दिखाए--घर घर में शांति हो हर बच्चा मुस्कुराये
हर आदमी के मन से हो जाये दूर नफरत
इंसान के हो दिल में इंसान की मुहब्बत
नफरत की आँधियों से परमात्मा बचाए-घर घर में शांति हो हर बच्चा मुस्कुराये
सन २०१० में जो कुछ भी हो चुका है
सोचो अगर बहुत कुछ इंसान खो चुका है
यह वर्ष अब अमन का पैग़ाम लेके आये --घर घर में शांति हो हर बच्चा मुस्कुराये
कैसी ही उलटी सीधी आ जाये घर में दौलत
खुश हो रहा है दिल में ले लेके खूब रिश्वत
हर एक कर्मचारी मालिक का खौफ खाए--घर घर में शांति हो हर बच्चा मुस्कुराये
इस पर अमल भी करना जो कुछ कहा सुना है
देखो "हिलाल " की ये सबसे प्राथर्ना है
हर इक मनुष्य अपने कर्तव्य को निभाए --घर घर में शांति हो हर बच्चा मुस्कुराये

21 November 2010

ज़िन्दगी में तुम्हारी कमी रह गयी

जैसे कोई कलि अधखिली रह गयी
ज़िन्दगी में तुम्हारी कमी रह गयी

तू न आया न ही ख्वाब आये तेरे
तुझसे आँखों को नाराजगी रह गयी

अक्स क्या उड़ गया तेरा अलफ़ाज़ से
खाली बे रंग की शायरी रह गयी

अपने घर से चला जब मै परदेस को
दूर तक माँ मुझे देखती रह गयी

वो मेरे दिल से आकर चला तो गया
उसके क़दमो की कुछ ताजगी रह गयी

उससे मिलकर भी कब कह सका राज़-ऐ-दिल
बात मुंह की मेरे मुंह में ही रह गयी

उससे चाहा वफाओं का इकरार जब
उसके होंठो पे इक खामशी रह गयी

उसने इक बात भी मेरी चलने न दी
सारी तोहमत मेरे सर मढ़ी रह गयी

बाद-ऐ-तर्क-ऐ-मुहब्बत वो मुझसे 'हिलाल'
क्यों समझता है के दोस्ती रह गयी

कोई ज़ालिम किसी मजलूम पर जब ज़ुल्म ढाता है!

कोई ज़ालिम किसी मजलूम पर जब ज़ुल्म ढाता है!

ये मन्ज़र देखकर मेरा कलेजा काँप जाता है !


जो इस दर्द-ऐ-ग़म-ऐ-फुरक़त1 का अंदाज़ा लगता है !

वो मेरे आंसुओं की कद्र करना सीख जाता है !


मुहब्बत में बिछड़ने वाला अपनी जाँ गवाता है ?

न जाने कौन सी सदियों की तू बातें सुनाता है !


गुनाहों की नदामत2 से मै अपना मुंह छुपाये हूँ

कफ़न ये मेरे चेहरे से ज़माना क्यूँ हटाता है !



मै आँखों के लिए हर पल उसी के ख्वाब चुनता हूँ !

वो है के मेरी आँखों से मेरी नींदें चुराता है !


भुलाना चाहता है वो भुलाये शौक़ से लेकिन !

हुनर ये भूल जाने का वो मुझसे क्यूँ छुपाता है !


हथेली उम्र भर को ज़र्द3 पड़ जाती है फुरक़त4 में !

किसी का हाथ जब हाथों में आकर छूट जाता है !


तुम्हारी याद का मौसम बहुत ही सर्द है, उस पर

हवा करती है सरगोशी , बदन ये काँप जाता है !



हिलाल इस दौर में कमज़ोर की सुनता नहीं कोई

जिसे देखो वो ही कमज़ोर को आँखें दिखाता है !

१-जुदाई के ग़म का दर्द २-शर्मिंदगी ३-पीली

25 October 2010

जब चमन पुरबहार होते हैं

जब चमन पुरबहार होते हैं

खार भी लालाज़ार होते हैं

कौन साथी है दौर-ऐ-ग़ुरबत का

सब बनी के ही यार होते हैं

हम गिला क्या करें जफ़ाओं का

जब सितम बार बार होते हैं

टूट जाते है चन्द बातों से

रिश्ते कम पायदार होते हैं

अजनबी हमसफ़र तो ऐ लोगों

रास्ते का गुबार होते हैं

आज के दौर की अदालत में

बेगुनाह गुनाहगार होते हैं

जिनमे इमरज-ऐ-बुग्ज़-ओ-कीना हो

क़ल्ब वो दाग़ दार होते है

यूँ न अबरू को दीजिये जुम्बिश

हम तो खुद ही शिकार होते है

ये हकीक़त है आज महलों की

मकबरों में शुमार होते हैं

नाज़ खुद पर "हिलाल" मत करना

तुझसे शायर हज़ार होते है